Thursday, May 17, 2012

desh prem


हैं लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर
और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में हैं
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं

हाथ, जीन में हो जूनून, कटते नहीं तलवार से
सर जो उठ जातें हैं वह झूकते नहीं ललकार से
और भडकेगा जो शोला-सा हमारे दिल में हैं
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं

हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पे कफन
चाहतें ली भर, लिए लो भर चले हैं ये कदम
जिंदगी तो अपनी मेहमान, मौत की महफिल में हैं
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं

दिल में तूफानों की टोली और नसों में इन्किलाब
होश दुश्मन के उडा देंगे हमें रोको ना
दूर रह पायें जो हम से दम कहां मंझिल में हैं
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं
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जुल्म, भूख और बेरहमी कभी

इस जहां से खत्म नहीं हो सकती।

उनसे लड़ने के नारे सुनना अच्छा लगता है

गरीबी बुरी, पर महफिल में खूब फबती।
हैं लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर
और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में हैं
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं


हाथ, जीन में हो जूनून, कटते नहीं तलवार से
सर जो उठ जातें हैं वह झूकते नहीं ललकार से
और भडकेगा जो शोला-सा हमारे दिल में हैं
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं

हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पे कफन
चाहतें ली भर, लिए लो भर चले हैं ये कदम
जिंदगी तो अपनी मेहमान, मौत की महफिल में हैं
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं

दिल में तूफानों की टोली और नसों में इन्किलाब
होश दुश्मन के उडा देंगे हमें रोको ना
दूर रह पायें जो हम से दम कहां मंझिल में हैं
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं

Maa aap ko shat shat naman.

कब्र के आगोश में जब थक के सो जाती है माँ,
तब कहीं जा कर, ज़रा थोड़ा सुकूँ पाती है माँ।
फिक्र में बच्चों की कुछ ऐसी घुल जाती है माँ,
नौजवाँ हो कर के भी, बूढ़ी नज़र आती है माँ।
रूह के रिश्तों की ये गहराइयाँ तो देखिये,
चोट लगती है हमारे और चिल्लाती है माँ।
कब ज़रूरत हो मेरी बच्चों को इतना सोच कर,
जागती रहती हैं आँखें और सो जात है माँ।
चाहे हम खुशियों में माँ को भूल जायें दोस्तों,
जब मुसीबत सर पे आ जाए, तो याद आती है माँ।
लौट कर सफर से वापस जब कभी आते हैं हम,
डाल कर बाहें गले में सर को सहलाती है माँ।
हो नही सकता कभी एहसान है उसका अदा,
मरते मरते भी दुआ जीने की दे जाती है माँ।
मरते दम बच्चा अगर आ पाये न परदेस से,
अपनी दोनो पुतलियाँ चौखट पे धर जाती है माँ।
प्यार कहते है किसे और ममता क्या चीज है,
ये तो उन बच्चों से पूँछो, जिनकी मर जाती है माँ।
One must disown a person to save a family. 
One family can be sacrificed to save village.
A village has to be abandoned to save a state. 
But if one needs to save his soul, 
he must abandon the entire world.

There are three kinds of fools in the world 

one who has lot of desires in spite of being penniless,

 one who gets into fights (quarrels) in spite of being poor (and hence at a disadvantage), 

one who gets into a debate without having enough knowledge about the subject matter.





जिनको भी मेरे भारत की धरती से प्यार नहीं होगा
उनको भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं होगा
धरती से अम्बर से कहना, हर ताल समंदर से कहना
कहना कारगिल की घाटी से, गोहाटी से चौपाटी से
ख़ूनी परिपाटी से कहना, दुश्मन की माटी से कहना
कहना लोभी, मक्कारों से जासूसी करने वालों से
जो मेरा आँगन तोड़ेगी वो बाँह तोड़ दी जाएगी
जो आँख उठेगी भारत पर वो आँख फोड़ दी जाएगी
सैंतालिस का बंटवारा भी कोई अंधा रोष रहा होगा
जिन्ना की भूख रही होगी, गाँधी का दोष रहा होगा
जो भूल हुई हमसे पहले, वो भूल नहीं होने देंगे
हम एक इंच धरती भारत से अलग नहीं होने देंगे
जो सीमा पार पड़ोसी है
उसको तो क्या समझाना है
वो बंटवारे का रोगी है उसका ये रोग पुराना है
लेकिन रावलपिंडी पहलेअपने दामन में तो झाँके
अपने घर का आलम देखे मेरे आँगन में ना ताके
भारत में दखलंदाजी की तो पछताना पड़ जायेगा
रावलपिंडी, लाहौर, कराची तक भारत कहलायेगा

I don’t want to be,
A wealthy man,
Nor I want to be,
A working man.

I want to be,
A great soldier,
Fighting on the front,
with a gun on my shoulder,

I want to die for,
My great, beloved nation,
And for my enemy,
I shall have no compassion,

I want to let the
Chinese know
That Indians can die,
For their Motherland.
 
 
 
 
 Gen V.K. Singh as a Std VIII student, culled from his school magazine
 
 
 



 चीनी सालों होश में आओ वर्ना होश में ला देंगे
तेरी माँ की माँ को भी हम नानी याद दिला देंगे
गया ज़माना बात-बात पर हमको आँख दिखाते थे
और हिन्दुस्तानी हम सीधे सादे चुपचाप रह जाते थे
अब तो आँख दिखा के देखो सीधे आँख फोड़ देंगे
अग्नि पृथ्वी सारी मिसाइलें बीजिंग तक घुसेड देंगे
छोडो अरुणांचल-सिक्किम पर घडी-घडी दावा करना
जब देखो अपने धन-बल का रोज़ - रोज़ हौवा करना
अच्छा होगा इज्ज़त से हिमालय के उस पार ही रहना
अच्छा होगा अपनी छोटी सी चार फुटी औकात में रहना
वर्ना यहीं से बैठे - बैठे हम खोपड़ी तुम्हारी खोल देंगे
तुम चीनियों को हम शरबत जैसा पानी में घोल देंगे
इतराते हो जिस दीवार पे मिनटों में ध्वस्त हो जायेगी
हिरोशिमा-नागासाकी से भी भयानक तबाही हो जायेगी
पूरी दुनिया में अब भारत की शान का परचम लहराता है
बाप तुम्हारा अमरीका भी अब यहाँ आके दम हिलाता है
ताकतवर होने पर भी हम छोटे देशों को नहीं डराते हैं
शांतिप्रियता और भाईचारे के लिए हम "चर्चित" कहलाते हैं



Jai Jai Bharat Mata
कोई कह दे कब काशी ने काबा की दीवारें तोड़ी,
हमने कब मक्का में जाकर मस्जिद या मीनारें तोड़ी !   तुम खूब पढो कुराने किन्तु हमको भी वेद पढ़ाने दो,
चन्दा से बैर नहीं लेकिन सूरज को अर्ध्य चढाने दो !!
पर अपनी धर्मसुरक्षा में सूरज की आग नहा लेंगें,
गंगा को पड़ी जरूरत यदि शोणित की नदी बहा देंगे !!
हम सागर हैं पर मत भूलो बलबावन बनकर तपते हैं,
बर्फीली परतों में भी लपटों वाले वंश पनपते हैं !!
तो साफ़ बता दूं अब हिंसक हर लहर मोड़ दी जाएगी,
क्रान्तिग्रंथ में एक कहानी और जोड़ दी जाएगी !!
जो उपवन पर घात करे वो शाख तोड़ दी जाएगी,
जन्मभूमि पर उठी हुई हर आँख फोड़ दी जाएगी !!.

 Jindagi ne kae sawalat badal daale, 
wakt ne mere halaat badal daale,
jo hum kal the wahi ham aaj bhi hai, 
bas mere liye logo ne apne khayalat badal daale..



 Bharat Mata Ki Jai