सोचता हूँ क्या दे पाउँगा जो मैंने पाया है इस देश से.
क्या मैं कभी चुका पाउँगा जो मैंने पाया है इस देश से ||.
फेलाना है मुझे देश सम्मान की भावना.
शायद इस तरह नज़र मिला पाऊं इस देश से ||.
खोया है हर नागरीक जाने किस होड़ मैं.
दिलाना है याद उसे इस देश की ||.
मौका है गडतंत्र दिवस.
मिल के सुंदरता बढ़ाना है इस देश की ||.
क्या मैं कभी चुका पाउँगा जो मैंने पाया है इस देश से ||.
फेलाना है मुझे देश सम्मान की भावना.
शायद इस तरह नज़र मिला पाऊं इस देश से ||.
खोया है हर नागरीक जाने किस होड़ मैं.
दिलाना है याद उसे इस देश की ||.
मौका है गडतंत्र दिवस.
मिल के सुंदरता बढ़ाना है इस देश की ||.
........JAI HIND..........


