Tuesday, June 19, 2012

 हौसले हो बुलंद तों इरादों में भी पैनी धार मिलती हैं
वरना रेत की मानिंद जिंदगी मुठ्ठी से बेकार फिसलती हैं
मेरी ख़ामोशीयो को मेरी,,कमजोरी मत समझना तू,
जब चलती हैं निःशब्द हाथो से तब एक तलवार चलती हैं..

जिंदगी से मतलब नही,शहीदी तमन्ना मचलती हैं
उखड़ी उखड़ी साँसे ,,अब कुछ रह रह कर संभलती हैं
एक नया सवेरा दे जायेंगे,,हम आने वाली नस्लों को
नही तों कितनी ही शामे यहाँ,,गुमनामी सी पिघलती हैं..

हमे दल्ला मत समझना तू,किसी भी पार्टी का सुन ले
लबो से मुफ्त में गाली,,तेरे लिए हर बार निकलती हैं
मोदी संग जुड़े हैं सब,,क्या बच्चे,,बूढ़े और जवां ए ''निःशब्द''
और जब बूढी हाथो में हो बारूद ,,तब कही सरकार हिलती हैं

........JAI HIND..........

 जो निकल पड़े हो मर मिटने अब,वतन की आन के लिए
जिसने जला डाली आधी जिंदगी,,अपने हिंदुस्तान के लिए
हल दिल जिसे चाहता हैं कि यही हो भारत का नया राष्ट्रपति
मैं तहे दिल से दुआ करता हूँ,,ऐसे ''अब्दुल कलाम'' के लिए

जिसके हाथ कभी ना उठे,,सोनिया के आगे सलाम के लिए
जो हमेशा हर दिल में जगह बनाते रहे हर खासो आम के लिए
जिसने असली भारतीय होने की कई कई मिसाले पेश की
झुकता हैं ''निःशब्द '' सिर्फ आज,,ऐसे मुसलमान के लिए

जिसने अपनी चाहतो की हर हवेली तोड़ दी,इस जहान के लिए
जो हमेशा जाना गया अपनी सादगी और अपने काम के लिए
जिसमे थी कुवत दिखाने की हर मुल्ला मुसल्लम को आईना
जो एक नजीर बन गया हैं आज खुद मुहम्मद इस्लाम के लिए

उसे बना दो फिर से राष्ट्रपति इस हिंदुस्तान के लिए
आज तों कम से कम जग जाओ दोस्तों इस इंसान के लिए
सिर्फ 08082891049 पर देनी हैं तुम्हे एक मिस काल आज
कभी तों कुछ किया करो अपने इस भारत महान के लिए .....



वन्देमातरम.....................इन्कलाब जिन्दाबाद

........JAI HIND..........

Saturday, June 16, 2012

ताश के पत्तों से महल नही बनता ,
नदी को रोकने से कभी समंदर नहीं बनता ,
लड़ते रहो जिंदगी से हर घडी हर पल क्यूंकि ,
एक ही जीत से कोई सिकंदर नही बनता................

 देख आज ये भारत जाग रहा है, देखके के दुश्मन भाग रह है l
दुश्मन खड़ा नहीं है सामने, दुशमन तेरे साथ खडा है l
वो शब्द तेरे ही अलाप है, वो तुझको ही भांप रहा है l
न्याय का झूठा ढोंग दिखाकर, वो तुझको ही मार रहा है l
खुद हि दंगे करवाता वो, खुद ही जांच कराता है l
लेकर साथ गरीबों का वो, महलों पे महल बनाता है l
जात पात की आग लगाकर, वो सुकून से सो रहा है l
खुली आँख से सोने वालों, जब जागो तभी सवेरा है l
देख गौर से आज देश को चारों ओर अँधेरा है l
इस जंगे मैदान में अपनी पारी खेल गए वो अब बारी हमारी है l

भारत माता की जय



........JAI HIND..........

Wednesday, June 13, 2012

 खोलता रगों मई लहू रना व शिवाजी वाला, लहू का उफान कभी चुकने न पायेगा.
पन्ना ढाई हाडा रानी का ये बलिदानी देश, क़ुरबानी मई कलेजा दुखने न पायेगा.
शेखर शुभस अशफाक की धरा है यहाँ, क्रांति का प्रवाह कभी रुकने न पायेगा.
सो करोड़ जनता के दिल मई लहरता ये लाडला तिरंगा कभी जुकने न पायेगा.


........JAI HIND..........
मुसीबत में शरीफ़ों की शराफ़त कम नहीं होती,
करो सोने के सौ टुकडे तो क़ीमत कम नहीं होती.
मुझे बचपन में ये सीख दी है मेरी मम्मी ने,
बुज़ुर्गों की दुआ लेने से इज्ज़त कभी कम नहीं होती.
जरूरतमंद को कभी देहलीज से ख़ाली ना लौटाओ,
भगवन के नाम पर देने से दौलत कम नहीं होती.
पकाई जाती है रोटी जो मेहनत के कमाई से,
हो जाए गर बासी तो भी लज्ज़त कम नहीं होती
याद करते है अपनी हर मुसीबत में जिन्हें हम
गुरु और प्रभु के सामने झुकने से गर्दन नीचे नहीं होती

जय हिंद ... वन्देमातरम .....

ना धरा न हमें आसमान चाहिए ,ना ही हमें ये सारा जहान चाहिए !
इच्छा नहीं टूटे फूटे घर की हमें ,हमें तो हमारा हिन्दुस्थान चाहिए !
हमें तो हमारा हिन्दुस्थान चाहिए ....
ना हमें छिछोरी राजनीती चाहिए ,न ही कपटी जनों की प्रीति चाहिए !
कोई रजा रानी होगा अपने लिए ,हमें न किसी से दया दान चाहिए !
हमें तो हमारा हिन्दुस्थान चाहिए.......
कृष्ण कन्हैया का देवालय चाहिए ,काशी विश्वनाथ की शिवालय चाहिए !
बद्री जगनाथ की सूर्म्या घाटियाँ ,राम लला का जन्म स्थान चाहिए !!
हमें तो हमारा हिन्दुस्थान चाहिए ......



........JAI HIND..........

Tuesday, June 12, 2012






 "Dream, Dream and Dream
Dream transforms into thoughts
Thoughts results into action
And we will succeed."

--By" BHARAT RATNA" Dr. APJ Abdul Kalam


........JAI HIND..........
  

"Your beliefs become your thoughts
Your thoughts become your words
Your words become your actions
Your actions become your habits
Your habits become your values
Your values become your destiny"

........JAI HIND..........

 Where there is righteousness in the heart
There is beauty in the character.
When there is beauty in the character,
There is harmony in the home.
When there is harmony in the home.
There is order in the nation.
When there is order in the nation,
There is peace in the world.

........JAI HIND..........

Monday, June 11, 2012







"ए पी जे अब्दुल कलाम द्वारा सफलता के सूत्र":----

 
(1) जिज्ञासा ,
 (2.) ज्ञान,
 (3) लगन, 
(4) परिश्रम,
 (5) जानकारी,
 (6) दृढ़ संकल्प,
(7) विचारमंथन
---------------------------------------------------------------------

" ज्ञान का द्वीप जलाए रखूँगा "------ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

‘हे भारतीय युवक
ज्ञानी-विज्ञानी
मानवता के प्रेमी
संकीर्ण तुच्छ लक्ष्य
की लालसा पाप है।
मेरे सपने बड़े
मैं मेहनत करूँगा
मेरा देश महान् हो
यह प्रेरणा का भाव अमूल्य है,
कहीं भी धरती पर,
उससे ऊपर या नीचे
दीप जलाए रखूँगा
जिससे मेरा देश महान हो।

Saturday, June 9, 2012



 है जग-जीवन की जननी तू
तेरा जीवन ही है त्याग ।
है अमूल्य वैभव वसुधा का
तेरा मूर्तिमान अनुराग ।

धूल-धूसरित रत्न जगत का
है तेरी गोदी का लाल ।
है जग-बाल जलज का रक्षक
माँ, तेरा मृदु बाहु मृणाल ।

कितनी घोर तपस्या करके
पाती है तू यह वरदान ?
किन्तु विश्व को अनायास ही
कर देती है उसे प्रदान ।

है तुझसे ही लालित-पालित
यह भोला-भला संसार ।
करती है प्लावित वसुधा को
तेरी प्रेम सुधा की धार ।

तेरे दिव्य हृदय में जिसका
रहता है सदैव संचार ।
लिए अंक में मृदुल सुमन को
लता दिखाती है वह प्यार ।

वनस्थली के अंग-अंग में
होता तेरा प्रेम-विकास ।
नव-बसंत उसके आँगन में
जब क्रीड़ा करता सोल्लास ।

सुत वियोग-दुख से विह्वल हो
रोते हैं माँ तेरे प्राण ।
किन्तु सभी कुछ सह लेती तू
हो जिससे जग का कल्याण ।

 
Jai Maa 
Jai Maa Bhaarathi


 ........JAI HIND..........

Thursday, June 7, 2012






 Guys please share it . If a gal posts ''hi'' as her status message she gets thousands of likes . But when a soldier gives his life for his country , people hide in their holes. Why the shame people . Yeah a jawan might be fierce and not sexy while a film actress might be beautiful and sexy ? but lemme remind u this jawan is the reason u snore in ur bed . See ur family happy . And if u dnt wanna share it its fine but please dnt support the antinationals and terrorists..
........JAI HIND..........

क्रांति कैसे आयेगी?


भ्रान्ति है यह पूछना कि
क्रांति कैसे आयेगी?
क्रांति खुद आती नहीं है.
क्रांति लाते
सिर कटाकर वे
जिन्हें तुम
सिरफिरा कहते हुए
थकते नहीं हो.
क्रांति लाते
जां हथेली पर लिये वे
देख जिनको
भागते हो तुम
कभी रुकते नहीं हो.
क्रांति लाते
आँख में सपना लिये वे
सामने जिनके अदब से
तुम कभी झुकते नहीं हो.
*
शब्द-वीरों ने हमेशा
क्रांति की बातें करीं
भाषण दिये पर
क्रांति से रह दूर
अपना स्वार्थ साधा.
सच कहूँ तो
क्रांति के पथ में हमेशा
निज हितों का ध्यान रखता
यही तबका बना बाधा.
*
कौन हो तुम?
चाहते क्या?
आकलन खुद का करो
निष्पक्ष रहकर.
निज हितों का
कर न सकते
त्याग यदि तो
क्रांति की बातें न कर
तुम होंठ सी लो.
अन्यथा बातें तुम्हारी
मानकर सच
जां गँवा बैठेंगे
बदलाव के चाहक
जवां बच्चे अकारण.
*चन्द्र शेखर आजाद क्रांति सेना की तरफ से सब भाई को जय हिंद.....


........JAI HIND..........
माना कि मन की बात लिखना जरुरी है
माना कि जीवन की बात लिखना जरुरी है
पर इन सबसें भी ऊपर उठ कर आशा
अपने वतन की बात लिखना जरुरी है
माना कि सावन की बात लिखना जरुरी है
माना कि बसंत की बात लिखना जरुरी है
पर वक्त की नब्ज को पकड़ कर आशा
अब परजातंत्र की बात लिखना जरुरी है.

.....JAI HIND...

Friday, June 1, 2012

मंजिल तो मिल ही जायेगी
भटक कर ही सही !

गुमराह तो वो होगें
जो घर निकलेगे ही नही !

 यह प्रजातंत्र एक मंडी है
हर व्यक्ति यहाँ पे घमंडी है
तुम मत ढूढ़ों अर्जुन माधव
अब हर किरदार शिखंडी है ...


........JAI HIND..........
  


देश पर एक ही परिवार का शासन क्यूँ !
और बाकि सब फिरते भूखे भाने क्यूँ !!
जब झंडे छु रहे आसमानों को !
ये देश का भविष्य भूखे नंगे क्यूँ !!
फौजी बोर्डर पे मरता है उसे कोन याद करता है !!
ग्रोथ रेट है 8 या 9 ये पी .एम दावे करता है !!
दावे दुवे छोड़ बाबा(मनमोहन), मर गया जट(किसान) बचाले !!
तू मालिक बाबा सेंटर(केन्द्र) का, मेरी मानले या अपनी मनाले !!!

........JAI HIND..........


मैं प्यार की भूखी हूँ
इस तलाश में जीना है मारना है|
जब तक मिट न जाऊँगी मैं
ज़िंदगी का हर पल मारना है|

सुना है वो प्यार से सिचे
तो पत्थर भी फूल बनजते है|
जो वो मरहम लगा दे तो
तो नासूर भी पनप न पाते है|

बिटिया बचावो. ...


........JAI HIND..........




 खरी खरी कहता हूँ मैं बात दोस्तों !

अच्छे नहीं है देश के हालात दोस्तों !!

गर्भ में मारी जाती हो जब कन्याए !

यही तो पतन कि शुरुवात दोस्तों !!


........JAI HIND..........



लिखो जो तारीखे गुलशन हमे भी याद कर लेना !!

के इस गुलशन के लिए ही उजाडा था हमने आशियाँ अपना !!

........JAI HIND..........




कोई कह दे कब काशी ने काबा की दीवारें तोड़ी,
हमने कब मक्का में जाकर मस्जिद या मीनारें तोड़ी !!
तुम खूब पढो कुराने किन्तु हमको भी वेद पढ़ाने दो,
चन्दा से बैर नहीं लेकिन सूरज को अर्ध्य चढाने दो !!
पर अपनी धर्मसुरक्षा में सूरज की आग नहा लेंगें,
.गंगा को पड़ी जरूरत यदि शोणित की नदी बहा देंगे !!
हम सागर हैं पर मत भूलो बलबावन बनकर तपते हैं,
बर्फीली परतों में भी लपटों वाले वंश पनपते हैं !!
तो साफ़ बता दूं अब हिंसक हर लहर मोड़ दी जाएगी,
क्रान्तिग्रंथ में एक कहानी और जोड़ दी जाएगी !!
जो उपवन पर घात करे वो शाख तोड़ दी जाएगी,
जन्मभूमि पर उठी हुई हर आँख फोड़ दी जाएगी !!.



........JAI HIND..........




 केसर की क्यारी में तुमको ईद मनाने ना देंगे !

कश्मीर में कौमी ध्वज तुम्हे फहराने ना देंगे !!

ढाका की मलमल दे दी ,पर माँ का चीर ना देंगे !

लाशों से पाट देंगे तेरी धरती को ,मगर कश्मीर ना देंगे !!

साफ़ शब्द में सुनले ऐ पाकिस्तान ,

तुझे कश्मीर तो क्या कश्मीर की तस्वीर भी ना देंगे !!

........JAI HIND..........

Tuesday, May 29, 2012


 आस्तीं धो रहा है सन्नाटादुश्मनी दिल की पुरानी चल रही है जान से .......
लडते लडते ज़िन्दगी गुजरी है बे ईमान से .....

ऐ वतन एक रोज तेरी ख़ाक में खो जायेगे ,सो जायेगे
मर के रिश्ता नहीं टूटेगा हिन्दुस्तान से ...ईमान से...


........JAI HIND..........

 सिर्फ झूठ की पैठ सदन में सच के लिए मनाही है
चोर वहाँ का राजा है
सहयोगी जहाँ सिपाही है ।
जो कपास की खेती करता उसके पास लँगोटी है
उतना महँगा ज़हर नहीं है जितनी महँगी रोटी है
लाखों टन सड़ता अनाज है
किसकी लापरवाही है ।
चारों ओर तबाही भइया
चारों ओर तबाही है ।

........JAI HIND..........

हमसफ़र सो रहा है सन्नाटा
दास्ताँ हो रहा है सन्नाटा

कोई दस्तक न कोई आहट है
चैन से सो रहा है सन्नाटा

कैसे रंगीनियों में डूबीं रात
खुसबुए बो रहा है सन्नाटा

दूधिया चांदनी को ओढ़े हुए
बेखबर सो रहा है सन्नाटा

क़त्ल करके तमाम आवाज़ें
आस्तीं धो रहा है सन्नाटा


........JAI HIND..........




हिंदू धर्म, विश्व का सबसे प्राचीन धर्म, जो कब
और कैसे शुरू हुआ किसी को नहीं पता. ये
अनादि काल से चला आ रहा है. ये विश्व
का एकमात्र ऐसा धर्म है जो किसी एक
व्यक्ति ने नहीं बनाया. विश्व केसभी धर्मो के
बारे में प्रमाण उपलब्ध हैं की किस धर्म को किस
व्यक्ति ने बनाया|
हिंदू धर्म के बारे में जो सबसे पुराना प्रमाण
उपलब्ध है उसके अनुसार "इन्दुस"नदी (वर्तमान
में सिंधु जो की पाकिस्तान में है) की घाटी में
रहने वाले लोगों को हिंदू कहा गया। इससे
पुराना प्रमाण किसी धर्म के बारे में प्राप्त
नहीं हुआ है. ऋग वेद, हिंदू धर्म का सबसे प्राचीन
वेद। अगर इसको विश्व की सबसे पुरानी किताब
कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.ज्योतिष
शास्त्र, आकाश के ग्रहों, नक्षत्रों और
तारामंडलों के अध्यन की कला समूचे विश्व
को हिंदू धर्म से ही मिली.विक्रमी संवत,
दुनिया को दिन, महीने और साल
की जानकारी देने वाला पहला पंचांग
(calendar) हिन्दुओं ने ही बनाया।
बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध हिंदू थे।
जैन धर्म के संस्थापक महावीर जैन भी हिंदू थे।
सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव भी हिंदू
ही थे।
उपरोक्त तो बस कुछ ही बिन्दु हैं। हिंदू धर्म
कितना महान है ये किसी की कल्पनाके भी परे
है। इतने महान धर्म पर सदियों सेप्रहार होते
आए हैं इसको नष्ट करने के लिए। मुसलमानों ने सन्
712 में सिंध का छेत्र जीत कर वहाँ अपने इस्लाम
धर्म की नींव रखी और सन् 875 तक सिंधु नदी के
छेत्र में उन्होंने अपना पूर्ण रूप से अधिकार कर
लिया। सन् 1017 में मुहम्मद गजनी ने मथुरा और
गोकुल को लूटा और वहाँ एक मस्जिदबनाईं।
सन् 1024 में मुहम्मद गजनी ने सोमनाथ के
मन्दिर पर आक्रमण कर मन्दिर को नष्ट करा।
वहाँ शिवलिंग को खंडित कर दिया और करीब
50,000 से ज्यादा हिन्दुओ का कत्ल किया।
वहाँ भी उसने एक मस्जिद बनाईं। सोमनाथ के
मन्दिर पर उसने इस प्रकार से 17 बार आक्रमण
करा। सन् 1197 में मुस्लिम इख्तियार उददीन ने
नालंदा विश्वविध्यालय (बिहार में) को नष्ट
किया जो उस समय का विश्व का सर्वश्रेष्ठ
विश्वविद्यालय था। सन् 1528 में बाबर ने
अयोध्या का राम मन्दिर तोड़ कर
वहाँ बाबरी मस्जिद बनाईं। सन् 1658 में
औरंगजेब ने जबरन हिन्दुओं को इस्लाम कबूल करने
पर मजबूर करा। जिन्होंने इस्लामकबूल
नहीं करा उन पर ज़ुल्म किए गए और मार
दिया गया। सन् 1688 में औरंगजेब ने मथुरा और
आस पास के करीब 1000 मन्दिर तुड़वा दिए।
मुगलों के कुल शासनकाल में करीब 60,000
मन्दिर तोडे गए। सन् 1761 में अहमद शाह
दुर्रानी ने उत्तर भारत में 2,00,000 हिन्दुओं
को मौत के घाट उतार दिया।
इसके बाद हिन्दुस्तान पर अंग्रेजो का आधिपत्य
हो गया और फिर उन्होंने अपने इसाई धर्म
को बढावा दिया। अंग्रेजों के अत्याचार
की कहानी तो जलियाँ वाला बाग़ सुनाता है।
इस प्रकार से हमारी हिंदू सभ्यता और
संस्कृति को कई बार पैरों तले रौंदा गया।
कभी मुसलमानों ने और कभी इसाईओं ने. बहुत सह
चुके हम और बहुत सह चुका हिंदू धर्म। अब हम और
नहीं सहेंगे।
"त्रेता युग और द्वापर युग की तरह इस युग में
भी भगवान धर्म की रक्षा के लिए और अधर्म के
विनाश के लिए धरती पर अवतार लेंगे." ऐसा सोच
कर हम कब तक भगवान के अवतरण
की प्रतीक्षा करेंगे? और वैसे भी कहा गया है
की "जो अपनी सहायता स्वयं करते हैं, भगवान
भी उन्हीं की सहायता करते हैं।" इसीलिए
भगवान से सहायता लेने के लिए पहले हमें स्वयं
ही कदम उठाना होगा, शंखनाद
करना होगा दुनिया को बताने के लिए कि हिंदू
धर्म में दया और करुणा तभी तक दिखाई जाती है
जब तक पापी अपनी सीमा में रहे।
तो आइये, हिंदू धर्म की रक्षा और उत्थान के लिए
हम सभी एकजुट होकर आह्वान करते हैं।





........JAI HIND..........

Monday, May 28, 2012


माँ जैसी दौलत दुनिया में नही है,
माँ जिसके है पास वह सबसे धनी है।

माँ तो है अनमोल न कीमत लगाना
रखना ख्याल उसका ,न उसको रुलाना,
माँ के रुदन से ही हिलती ज़मीं है।
माँ जिसके है पास वह सबसे धनी है॥

माँ गर न होती यह दुनिया न होती
न आकाश होता ,ज़मीं भी न होती,
माँ के जतन से ही सृष्टि पली है ।
माँ जिसके है पास वह सबसे धनी है॥


 ........JAI HIND..........


: आसू को तेज़ाब बना लो ::
:: इस दिल को फोलाद बना लो ::
:: हाथो को हथियार बना लो ::
:: बुद्धि को तलवार बना लो ::
:: फिर मेरे संग कदम मिलाकर ::
:: प्राणों में तुम आग लगाकर ::
:: ललकारो उन मक्कारों को ::
:: भारत माँ के गदारो को ::

 ........JAI HIND..........

अब वक़्त आ गया है अपना मौन तोडिये,
घर से बाहर निकले, ये रोना पीटना छोडिये,
आपके अनकूल न होगा कभी रुख हवा का,
बेहतर होगा की आप तूफां का रुख मोड़िये.

........JAI HIND..........
बेड़ा देश का गर्क हो गया ,
प्रधान जी आपका शासन भी नर्क हो गया ,
रहे होंगे कभी आप ईमानदार ,
लुच्चों से अब आपका भी संपर्क हो गया .

Saturday, May 26, 2012

  National flag was Burnt in J&K.
कश्मीर जो खुद सूरज के बेटे की रजधानी था
डमरू वाले शिव शंकर की जो घाटी कल्याणी था

कश्मीर जो इस धरती का स्वर्ग बताया जाता था
जिस मिट्टी को दुनिया भर में अर्ध्य चढ़ाया जाता था

कश्मीर जो भारतमाता की आँखों का तारा था
काश्मीर जो लालबहादुर को प्राणों से प्यारा था

काश्मीर वो डूब गया है अंधी-गहरी खाईमें
फूलों की खुशबू रोती है मरघट की तन्हाई में

ये अग्नीगंधा मौसम की बेला है
गंधों के घर बंदूकों का मेला है

मैं भारत की जनता का संबोधन हूँ
आँसू के अधिकारों का उदबोधन हूँ

मैं अभिधा की परम्परा का चारण हूँ
आजादी की पीड़ा का उच्चारण हूँ

इसीलिए दरबारों को दर्पण दिखलाने निकला हूँ |
मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला हूँ ||

बस नारों में गाते रहियेगा कश्मीर हमारा है
छू कर तो देखो हिम छोटी के नीचे अंगारा है

दिल्ली अपना चेहरा देखे धूल हटाकर दर्पण की
दरबारों की तस्वीरें भी हैं बेशर्म समर्पण की

काश्मीर है जहाँ तमंचे हैं केसर की क्यारी में
काश्मीर है जहाँ रुदन है बच्चों की किलकारी में

काश्मीर है जहाँ तिरंगे झण्डे फाड़े जाते हैं
सैंतालिस के बंटवारे के घाव उघाड़े जाते हैं

काश्मीर है जहाँ हौसलों के दिल तोड़ेजाते हैं
खुदगर्जी में जेलों से हत्यारे छोड़े जाते हैं

अपहरणों की रोज कहानी होती है
धरती मैया पानी-पानी होती है

झेलम की लहरें भी आँसू लगती हैं
गजलों की बहरें भी आँसू लगती हैं

मैं आँखों के पानी को अंगार बनाने निकला हूँ |
मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला हूँ ||

काश्मीर है जहाँ गर्द में चन्दा-सूरज- तारें हैं
झरनों का पानी रक्तिम है झीलों में अंगारे हैं

काश्मीर है जहाँ फिजाएँ घायल दिखती रहती हैं
जहाँ राशिफल घाटी का संगीने लिखती रहती हैं

काश्मीर है जहाँ विदेशी समीकरण गहराते हैं
गैरों के झण्डे भारत की धरती पर लहरातें हैं

काश्मीर है जहाँ देश के दिल की धड़कन रोती है
संविधान की जहाँ तीन सौ सत्तर अड़चन होती है

काश्मीर है जहाँ दरिंदों की मनमानी चलती है
घर-घर में ए. के. छप्पन की राम कहानी चलती है

काश्मीर है जहाँ हमारा राष्ट्रगान शर्मिंदा है
भारत माँ को गाली देकर भी खलनायक जिन्दा है

काश्मीर है जहाँ देश का शीश झुकाया जाता है
मस्जिद में गद्दारों को खाना भिजवाया जाता है

गूंगा-बहरापन ओढ़े सिंहासन है
लूले - लंगड़े संकल्पों का शासन है

फूलों का आँगन लाशों की मंडी है
अनुशासन का पूरा दौर शिखंडी है

मै इस कोढ़ी कायरता की लाश उठाने निकला हूँ |
मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला हूँ ||

हम दो आँसू नहीं गिरा पाते अनहोनी घटना पर
पल दो पल चर्चा होती है बहुत बड़ी दुर्घटना पर

राजमहल को शर्म नहीं है घायल होती थाती पर
भारत मुर्दाबाद लिखा है श्रीनगर की छाती पर

मन करता है फूल चढ़ा दूं लोकतंत्र की अर्थी पर
भारत के बेटे निर्वासित हैं अपनी ही धरती पर

वे घाटी से खेल रहे हैं गैरों के बलबूते पर
जिनकी नाक टिकी रहती है पाकिस्तानी जूतों पर

काश्मीर को बँटवारे का धंधा बना रहे हैं वो
जुगनू को बैसाखी देकर चन्दा बना रहे हैं वो

फिर भी खून-सने हाथों को न्योता है दरबारों का
जैसे सूरज की किरणों पर कर्जा हो अँधियारों का

कुर्सी भूखी है नोटों के थैलों की
कुलवंती दासी हो गई रखैलों की

घाटी आँगन हो गई ख़ूनी खेलों की
आज जरुरत है सरदार पटेलों की

मैं घाटी के आँसू का संत्रास मिटाने निकला हूँ |
मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला हूँ ||

जब चौराहों पर हत्यारे महिमा-मंडित होते हों
भारत माँ की मर्यादा के मंदिर खंडित होते हों

जब क्रश भारत के नारे हों गुलमर्गा की गलियों में
शिमला-समझौता जलता हो बंदूकों की नालियों में

अब केवल आवश्यकता है हिम्मत की खुद्दारी की
दिल्ली केवल दो दिन की मोहलत दे दे तैय्यारी की

सेना को आदेश थमा दो घाटी ग़ैर नहीं होगी
जहाँ तिरंगा नहीं मिलेगा उनकी खैर नहीं होगी

जिनको भारत की धरती ना भाती हो
भारत के झंडों से बदबू आती हो

जिन लोगों ने माँ का आँचल फाड़ा हो
दूध भरे सीने में चाकू गाड़ा हो

मैं उनको चौराहों पर फाँसी चढ़वाने निकला हूँ |
मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला हूँ ||

अमरनाथ को गाली दी है भीख मिले हथियारों ने
चाँद-सितारे टांक लिये हैं खून लिपि दीवारों ने

इसीलियें नाकाम रही हैं कोशिश सभी उजालों की
क्योंकि ये सब कठपुतली हैं रावलपिंडी वालों की

अंतिम एक चुनौती दे दो सीमा पर पड़ोसी को
गीदड़ कायरता ना समझे सिंहो की ख़ामोशी को

हमको अपने खट्टे-मीठे बोल बदलना आता है
हमको अब भी दुनिया का भूगोल बदलना आता है

दुनिया के सरपंच हमारे थानेदार नहीं लगते
भारत की प्रभुसत्ता के वो ठेकेदार नहीं लगते

तीर अगर हम तनी कमानों वाले अपने छोड़ेंगे
जैसे ढाका तोड़ दिया लौहार-कराची तोड़ेंगे

आँख मिलाओ दुनिया के दादाओं से
क्या डरना अमरीका के आकाओं से

अपने भारत के बाजू बलवान करो
पाँच नहीं सौ एटम बम निर्माण करो

मै भारत को दुनिया का सिरमौर बनाने निकला हूँ मैं घायल घाटी के दिल की धड़कन गाने निकला हूँ........JAI HIND..... कवि=हरिओम जी पँवार

Friday, May 25, 2012


 desh me dhi betiya mayus hai na saadh hai
dil pe rakh ke haath kahiye desh kya azaad hai
kam umer me saadi ki gadi me ye joti gaye
betiyan ban ban ke maayen zindgi khoti gaye
inki halat to abhi tak har tarf barbaad hai
dil pe rakh kar haath kahiye desh kya azaad hai.


........JAI HIND..........


 
नौ महीने तक हम तुझे,
कोख में छुपा के चले ,
दो वर्ष तक तो हम तुझे ,
गोद में उठा के चले ,
डेढ़ से दो वर्ष तो हम तेरी ,
हर अनकही कों भी समझे,
फिर तेरी माँ की बस,
बोली सुन के हर्षे

तेरे पहले कदम पर भी ,
हम ही बच्चे बन के उछले,
तेरे भूख प्यास कों भी समझे,
तेरे हर चाल ढाल कों समझे ,
तेरे हर प्रयत्न कू शाबासी हम दिये,
सीख जायें तु तब तक उत्साहित तुझे किये|
पढ़ना लिखना तुझे सिखायें ,
चलना सही डगर बतायें ,
डगमगायें ना कही तु ,
हम हर समय सहारा बान तेरा रहे ,
और आज तु जब बड़ा हो गया ,
हमें ही तु अपना बोझ कह गया |

बुढ़ापा जब हमारा लगा आने,
तब एक भी दिन तुझे हम भारी लगे लगने ,
पिछला सब कुछ भूल तुने ,
लगा अब दूसरों की है सुनने,
माँ तुझे अब लगी है खलने ,
हम से ही चला अपना पिंड छुड़ाने ,
छोड़ आया तु हमें ही वीरानें |

माँ कहने में भी अब लगी तुझे शर्म आने,
फिर भी मैं तो माँ हूँ तेरी ,
तुझे लग जायें यह दुआ मेरी ,
तेरे बच्चे ना करे यह गत तेरी ,
पलकों पर रक्खे आदर करे सदा तेरी ||










........JAI HIND..........

 
 
 
 
"हार नहीं जीत है ये पावन पुनीत है ये क्रन्तिकारी गीत है महान वन्दे मातरम,
भगत का गुरुग्रंथ बिस्मिल की हे ये गीता अशफाकुल्लाह का कुरान वन्दे मातरम.
जेल की दीवारों पे जो शहीदों ने लहू से लिखी, जंगे आज़ादी की दास्ताँ वन्दे मातरम.
जिसको फिरंगियों की फांसिया न रोक पाई, शुलियो पे गाया गया गन वन्दे मातरम."



........JAI HIND..........

इक गुजारिश है - बस थोड़ा सा रो देना........!!!

जब माँ का "कलेजा" कटकर अलग हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब मातृभूमि-रक्षण विफल हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब "कश्यप-तपोभूमि" पर तिरंग-भस्म हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब "स्व-धरा" पर विदेशी ध्वज-लग्न हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब भारत-भूमि का "मुकुट"-पतन हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब सन संतालिस (1947) कल हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब देह से "प्राणों" का "पृथक्करण" हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब पौरुष पर नपुंसकता स्थानापन्न हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !

थोड़ा-सा रो देना के ना हम बचा सके, न तुम बचा पाओगे........
थोड़ा-सा रो देना के हम लिखते रह गए, तुम पढ़ते रह जाओगे........



........JAI HIND..........

Thursday, May 24, 2012


 हे माँ मुझे वो शक्ति दे कि फिरसे जाग खड़ा हो जाऊं
भय कोसों मुझसे दूर रहे मैं पाताल चीरकर आ जाऊं
वो गर्जन सा हुंकार भरूँ जिसे सुन सिंघासन कांप उठे
भेदूं बाण दिलों पे कि जनमानस भी जग उठे

हे माँ मुझे वो शक्ति दे कि तेरा कर्ज चूका सकूँ l
तेरी लीला बड़ी अपार है वो फर्ज मैं निभा सकूँ l
देश हित में रहूँ समर्पण जीवन तुझको अर्पण कर सकूँ l
जिसे मानव शक्ति कि पहचान नहीं वो दर्पण उसे दिखा सकूँ l

मैं इस कविता को माँ भारती को समर्पित करता हूँ l
वन्दे मातरम
संतोष यादव






........JAI HIND..........

 कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ,
जिससे उथल-पुथल मच जाए,
एक हिलोर इधर से आए,
एक हिलोर उधर से आए,

प्राणों के लाले पड़ जाएँ,
त्राहि-त्राहि रव नभ में छाए,
नाश और सत्यानाशों का -
धुँआधार जग में छा जाए,

बरसे आग, जलद जल जाएँ,
भस्मसात भूधर हो जाएँ,
पाप-पुण्य सद्सद भावों की,
धूल उड़ उठे दायें-बायें,

नभ का वक्षस्थल फट जाए-
तारे टूक-टूक हो जाएँ
कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ,
जिससे उथल-पुथल मच जाए।

माता की छाती का अमृत-
मय पय काल-कूट हो जाए,
आँखों का पानी सूखे,
वे शोणित की घूँटें हो जाएँ,

एक ओर कायरता काँपे,
गतानुगति विगलित हो जाए,
अंधे मूढ़ विचारों की वह
अचल शिला विचलित हो जाए,

और दूसरी ओर कंपा देने
वाला गर्जन उठ धाए,
अंतरिक्ष में एक उसी नाशक
तर्जन की ध्वनि मंडराए,

कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ,
जिससे उथल-पुथल मच जाए,

नियम और उपनियमों के ये
बंधक टूक-टूक हो जाएँ,
विश्वंभर की पोषक वीणा
के सब तार मूक हो जाएँ

शांति-दंड टूटे उस महा-
रुद्र का सिंहासन थर्राए
उसकी श्वासोच्छ्वास-दाहिका,
विश्व के प्रांगण में घहराए,

नाश! नाश!! हा महानाश!!! की
प्रलयंकारी आँख खुल जाए,
कवि, कुछ ऐसी तान सुनाओ
जिससे उथल-पुथल मच जाए।

सावधान! मेरी वीणा में,
चिनगारियाँ आन बैठी हैं,
टूटी हैं मिजराबें, अंगुलियाँ
दोनों मेरी ऐंठी हैं।

कंठ रुका है महानाश का
मारक गीत रुद्ध होता है,
आग लगेगी क्षण में, हृत्तल
में अब क्षुब्ध युद्ध होता है,

झाड़ और झंखाड़ दग्ध हैं -
इस ज्वलंत गायन के स्वर से
रुद्ध गीत की क्रुद्ध तान है
निकली मेरे अंतरतर से!

कण-कण में है व्याप्त वही स्वर
रोम-रोम गाता है वह ध्वनि,
वही तान गाती रहती है,
कालकूट फणि की चिंतामणि,

जीवन-ज्योति लुप्त है - अहा!
सुप्त है संरक्षण की घड़ियाँ,
लटक रही हैं प्रतिपल में इस
नाशक संभक्षण की लड़ियाँ।

चकनाचूर करो जग को, गूँजे
ब्रह्मांड नाश के स्वर से,
रुद्ध गीत की क्रुद्ध तान है
निकली मेरे अंतरतर से!

दिल को मसल-मसल मैं मेंहदी
रचता आया हूँ यह देखो,
एक-एक अंगुल परिचालन
में नाशक तांडव को देखो!

विश्वमूर्ति! हट जाओ!! मेरा
भीम प्रहार सहे न सहेगा,
टुकड़े-टुकड़े हो जाओगी,
नाशमात्र अवशेष रहेगा,

आज देख आया हूँ - जीवन
के सब राज़ समझ आया हूँ,
भ्रू-विलास में महानाश के
पोषक सूत्र परख आया हूँ,

जीवन गीत भूला दो - कंठ,
मिला दो मृत्यु गीत के स्वर से
रुद्ध गीत की क्रुद्ध तान है,
निकली मेरे अंतरतर से!

written. by - बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

........JAI HIND..........


 ओ माँ थोड़े दिन सब्र करो अच्छे दिन लेकर आऊँगा !
जो कर्ज दूध का है मुझ पर उसको उतारकर जाऊँगा !!
जो भी तूफाँ आये उसको अपनी छाती सह जाऊँगा !
ओ माँ थोड़े दिन सब्र करो अच्छे दिन लेकर आऊँगा !
.
हैं सवा अरब मेरे भाई, दादा-दादी – ताऊ-ताई !
अरि की मजाल क्या तन छू ले, छू भी न सकेगा परछाईं !
नभमंडल में घन के ऊपर चढ़ मैं दुन्दुभी बजाऊँगा !
ओ माँ थोड़े दिन सब्र करो अच्छे दिन लेकर आऊँगा !
.
कुछ पुत्र तुम्हारे, अहंकार में डूब, मनुजता को भूले !
टुकड़ो में तुझको बाँट रहे, सत्ता मद में फूले-फूले !!
बस कुछ दिन सुख-निद्रा ले लें, उनको भी सबक सिखाऊंगा !
ओ माँ थोड़े दिन सब्र करो अच्छे दिन लेकर आऊँगा !
.
सूखे अधरों पर जीभ फेर, ओ माँ थोड़ा सा हँस दो ना !
उर के उत्तप्त धरातल को थोड़ा सा शीतल कर दो ना !!
बेबस आशंकित नयनों के आंसू मै देख न पाऊँगा !
ओ माँ थोड़े दिन सब्र करो अच्छे दिन लेकर आऊँगा !

"A patriot must always be ready to defendhis country ."
* " देश जले में कुछ ना बोलू में ऐसा गद्दार नहीं "*



........JAI HIND..........
........JAI HIND..........

Tuesday, May 22, 2012



ऐ पाकिस्तान कान खोलकर सुन ले
अबकी जंग छिड़ी तो, नाम निशान नहीं होगा
कश्मीर तो होगा , पर पकिस्तान नहीं होगा
लाल कर दिया तुने , श्री नगर की घटी को
किस गफलत में जगा रहे हो सोई हल्दीघाटी को
ज़हर पिलाकर मजहब का इन कश्मीरी परवानो को
भय और लालच दिखलाकर तुम भेज रहे नादानों को
खुले प्रशिक्षद खुले शस्त्र है,खुली हुई शैतानी है
सारी दुनिया जान गई है हरकत पाकिस्तानी है
बहुत हो चुकी मक्कारी बहुत हो चूका हस्तक्षेप
समझा दो उनको वरना भभक उठेगा सारा देश
देश अगर यदि खड़ा हो गया तो त्राहि -त्राहि मच जाएगी
पाकिस्तान के हर कोने में महाप्रलय आजाएगी
क्या होगा अनजान तुम्हे इसका अनुमान नहीं होगा
कश्मीर तो होगा पर पाकिस्तान नहीं होगा
ए कायर इस एटम पर हिम्मत कौन दिखलायेगा
इसे चलाने के लिए क्या बाप तुम्हारा आएगा
अबकी चिंता मतकर चेहरे का खोल बदल देंगे
इतिहास की क्या है हस्ती सारा भूगोल बदल देंगे
धरा हर मोड़ बदलकर लाहौर से गुजरेगी गंगा
इस्लामाबाद की छाती पर लहराएगा भारत का झंडा
रावलपिंडी और कराची तक सबकुछ गारथ हो जायेगा
सिन्धु नदी के आर - पार पूरा भारत हो जायेगा
फिर सदियों - सदियों तक जिन्ना जैसा शैतान नहीं होगा
कश्मीर तो होगा लेकिन पाकिस्तान नहीं होगा



........JAI HIND..........

Monday, May 21, 2012




सवाल आप हैं गर तो जवाब हम भी हैं
हैं ईंट आप तो पत्थर जनाब हम भी हैं

शरीफ़ हम हैं शरीफ़ों के वास्ते साहिब
जो हो खराब कोई तो खराब हम भी हैं



........JAI HIND..........


स्वतंत्रता दिवस पर उठते सवाल

देश में हड़तालें हैं,
चक्का जाम हैं,
सड़कें बंद हैं,
रेल बंद है,
बसें फूँकी जाती हैं..
टायर जलायें जाते हैं
पुतले फूँके जाते हैं
सबसे बड़ा लोकतंत्र है...
ये देश स्वतंत्र है..

स्कूल में गोली चलती है
बच्चे आत्महत्या करते हैं
एम.एम.एस बनते हैं,
ये देश के भविष्य हैं(?)
स्कूल कालेज की
दुकान लगती है,
सरेआम विद्या बिकती है
सबसे बड़ा लोकतंत्र है...
ये देश स्वतंत्र है...

कानून तोड़े जाते हैं
दुकानें जलाई जाती हैं
दंगे-फसाद आम हैं
आतंकवाद है,
हर राज्य में वाद-विवाद है
६१ सालों का आरक्षण खास है
सब निकालते भडास हैं
सबसे बड़ा लोकतंत्र है...
ये देश स्वतंत्र है...

इज्जत पर परमाणु करार है
नोटों पर बनती सरकार है
आतंकवादियों पर रूख नरम है
देश तोड़ना भाषा का करम है
राज ठाकरे का ’राज’ है
ये नेताओं के हाल हैं
ये कैसा तंत्र है (?)
’नोट’ या ’वोट’ तंत्र है
सबसे बड़ा लोकतंत्र है...
ये देश स्वतंत्र है...

३० प्रतिशत अशिक्षित हैं
खाना खिलाने वाला किसान
मजबूर है
बिना छत के मजदूर हैं
पीने को पानी नहीं
नदियों के पानी पर लडाई है
एकता की होती बड़ाई है
६१ सालों में बुराइयाँ
जस की तस हैं
ढीठ देश आज भी
बेबस है,
कमजोर है
जाने देश किस ओर है
सबसे बड़ा लोकतंत्र है!!!
ये देश स्वतंत्र है???




........JAI HIND..........


मेरे देशवाशियों
जब कभी आप खुलकर हंसोंगे ,
तो मेरे परिवार को याद कर लेना ...
जो अब कभी नही हँसेंगे...

जब आप शाम को अपने
घर लौटें ,और अपने अपनों को
इन्तजार करते हुए देखे,
तो मेरे परिवार को याद कर लेना ...
जो अब कभी भी मेरा इन्तजार नही करेंगे..

जब आप अपने घर के साथ खाना खाएं
तो मेरे परिवार को याद कर लेना ...
जो अब कभी भी मेरे साथ खा नही पायेंगे.

जब आप अपने बच्चो के साथ खेले ,
तो मेरे परिवार को याद कर लेना ...
मेरे बच्चों को अब कभी भी मेरी गोद नही मिल पाएंगी !!

जब आप सकून से सोयें
तो मेरे परिवार को याद कर लेना ...
वो अब भी मेरे लिए जागते है ...!!

मेरे देशवाशियों ;
शहीद हूँ मैं ,
मुझे भी कभी याद कर लेना ..
आपका परिवार आज जिंदा है ;
क्योंकि ,
नही हूँ...आज मैं !!!!!
शहीद हूँ मैं …………॥!!!!




........JAI HIND..........


जा चुके है सब और वही खामोशी छायी है,
पसरा है हर ओर सन्नाटा, तन्हाई मुस्कुराई है,
छूट चुकी है रेल ,
चंद लम्हों की तो बात थी,
क्या रौनक थी यहॉं,
जैसे सजी कोई महफिल खास थी,
अजनबी थे चेहरे सारे,
फिर भी उनसे मुलाक़ात थी,
भेजी थी किसी ने अपनाइयत,
सलाम मे वो क्या बात थी,
एक पल थे आप जैसे क़ौसर,
अब बची अकेली रात थी,
चलो अब लौट चलें यहॉं से,
छूट चुकी है रेल
ये अब गुज़री बात थी,
उङते काग़ज़, करते बयान्‍,
इनकी भी किसी से
दो पल पहले मुलाक़ात थी,
बढ़ चले क़दम,
कनारे उन पटरियों
कहानी जिनके रोज़ ये साथ थी,
फिर आएगी दूजी रेल,
फिर चीरेगी ये सन्नाटा
जैसे जिन्दगी से फिर मुलाक़ात थी,
फिर लौटेंगे और,
भारी क़दमों से,जैसे
कोई गहरी सी बात थी,
छूट चुकी है रेल,
अब सिर्फ काली स्याहा रात थी |

........JAI HIND..........

Sunday, May 20, 2012



सोचता हूँ क्या दे पाउँगा जो मैंने पाया है इस देश से.
क्या मैं कभी चुका पाउँगा जो मैंने पाया है इस देश से ||.
फेलाना है मुझे देश सम्मान की भावना.
शायद इस तरह नज़र मिला पाऊं इस देश से ||.

खोया है हर नागरीक जाने किस होड़ मैं.
दिलाना है याद उसे इस देश की ||.
मौका है गडतंत्र दिवस.
मिल के सुंदरता बढ़ाना है इस देश की ||.


........JAI HIND..........
 
We Are Not Human Beings
Having a Spiritual Experience.
We Are Spiritual Beings
Having a Human Experience.

........JAI HIND..........

 Waves are always our Inspiration, 
not because they look beautiful 
but because whenever they go down 
they come up with a greater speed.

........JAI HIND..........


 !! सुलझता फितूर.........@


आसमां का बरसना अभी बाक़ी है...
ज़मीं का उगना बाक़ी है...

बाक़ी है कहानी में कहानी की कहानी...
बात की बात करनी बाक़ी है...

क्या-क्या गुज़र चुका है अब तलक़....
क़तार में खड़ा बाक़ी अभी बाक़ी है...

वक़्त के कठघरे में वक़्त की पेशी बाक़ी है ...
और ख़त्म होने से पहले

अंजाम भी अपना अंजाम देखना चाहता है...
ये ख्वाहिशों की ख्वाहिशें कभी पूरी हो सकेंगी...

या रह जाएगी बाक़ी दास्तां हर कहानी की...


........JAI HIND..........

 !......गाँवों का रोना, दिल्ली को गाना लगता है.....!


चिड़िया की जाँ लेने में इक दाना लगता है
पालन कर के देखो एक जमाना लगता है ॥१॥

अंधों की सरकार बनी तो उनका राजा भी
आँखों वाला होकर सबको काना लगता है ॥२॥

जय-जय के नारों ने अब तक कर्म किये ऐसे
हर जयकारा अब ईश्वर पर ताना लगता है ॥३॥

कुछ भी पूछो, इक सा बतलाते सब नाम-पता
तेरा कूचा मुझको पागलखाना लगता है ॥४॥

दूर बजें जो ढोल सभी को लगते हैं अच्छे
गाँवों का रोना, दिल्ली को गाना लगता है ॥५॥

कल तक झोपड़ियों के दीप बुझाने का मुजरिम
सत्ता पाने पर, अब वो परवाना लगता है ॥६॥

टूटेंगें विश्वास, कली से मत पूछो कैसा
यौवन देवों को देकर मुरझाना लगता है ॥७॥

जाँच समितियों से करवाकर कुछ ना पाओगे
उसके घर में शाम-सबेरे थाना लगता है॥८॥

(हमारे नेताओं की लीलाओं को समर्पित ....



........JAI HIND..........




 तुम को देखा जैसे दरपन देख रहा हूँ .
कहीं छिपा तुम में अपना मन देख रहा हूँ.
नैन नासिका अधर कर्ण सुंदर सी ग्रीवा ,
एक सपन का भूमि अवतरन देख रहा हूँ.
कविता का सौन्दर्य तुम्ही से आया मुझ में,
फिर बरसे यह बादल, गर्जन देख रहा हूँ.
सूत्रपात हो तुम मधुरिम साहित्य निधि का,
रूप तुम्हारे में अनुपम धन देख रहा हूँ.
चाहूँ- प्यार करूँ -दिल में रखूं या गाऊं,
क्यूँ है तुम से यह आकर्षण देख रहा हूँ.
मधुर तुम्हारे सपने नैन चुराते आते ,
खुली आँख से वह आलिंगन देख रहा हूँ.

जय माँ भारती



........JAI HIND..........

Saturday, May 19, 2012


होंसले हो जिनके बुलंद वो बुलंदी पर रहेते हैं ,
जीत उन्ही को मिलती है जो हारना जानते हैं ,
कायर तो रास्ते से ही भटक जाते हैं ,
जिगर वाले ही मंजिल को पाते हैं ,
इंसान हो तो इंसानियत को मत भूलना,
भर पेट खाना तो जानवर भी खातें हैं


........JAI HIND..........

 "देश हे पुकारता,पुकारती हे माँ भारती

रक्त से तिलक करो गोलियों से आरती
........JAI HIND..........


चाँद, सूरज-सा तिरंगा
प्रेम की गंगा तिरंगा
विश्व में न्यारा तिरंगा
जान से प्यारा तिरंगा
सारे हिंदुस्तान की
बलिदान-गाथा गाएगा
ये तिरंगा आसमाँ पर
शान से लहराएगा।
जय जय वीर जवान,,,जय जय हिन्दुस्थान,,

........JAI HIND..........
 आंधियां चाहें उठाओ,
बिजलियां चाहें गिराओ,
जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा।

रोशनी पूंजी नहीं है, जो तिजोरी में समाये,
वह खिलौना भी न, जिसका दाम हर गाहक लगाये,
वह पसीने की हंसी है, वह शहीदों की उमर है,
जो नया सूरज उगाये जब तड़पकर तिलमिलाये,
उग रही लौ को न टोको,
ज्योति के रथ को न रोको,
यह सुबह का दूत हर तम को निगलकर ही रहेगा।
जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा।

दीप कैसा हो, कहीं हो, सूर्य का अवतार है वह,
धूप में कुछ भी न, तम में किन्तु पहरेदार है वह,
दूर से तो एक ही बस फूंक का वह है तमाशा,
देह से छू जाय तो फिर विप्लवी अंगार है वह,
व्यर्थ है दीवार गढना,
लाख लाख किवाड़ जड़ना,
मृतिका के हांथ में अमरित मचलकर ही रहेगा।
जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा।

है जवानी तो हवा हर एक घूंघट खोलती है,
टोक दो तो आंधियों की बोलियों में बोलती है,
वह नहीं कानून जाने, वह नहीं प्रतिबन्ध माने,
वह पहाड़ों पर बदलियों सी उछलती डोलती है,
जाल चांदी का लपेटो,
खून का सौदा समेटो,
आदमी हर कैद से बाहर निकलकर ही रहेगा।
जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा।

वक्त को जिसने नहीं समझा उसे मिटना पड़ा है,
बच गया तलवार से तो फूल से कटना पड़ा है,
क्यों न कितनी ही बड़ी हो, क्यों न कितनी ही कठिन हो,
हर नदी की राह से चट्टान को हटना पड़ा है,
उस सुबह से सन्धि कर लो,
हर किरन की मांग भर लो,
है जगा इन्सान तो मौसम बदलकर ही रहेगा।
जल गया है दीप तो अंधियार ढल कर ही रहेगा।
 


VANDEMATRAM

........JAI HIND..........