Tuesday, May 15, 2012

जो जुबां ने कहा सब जुबानी हुआ
अश्क दिल कि मगर तर्जुमानी हुआ

खूब गरजा,मगर, फिर भी बादल रहा
जब बरसने लगा,तब ही पानी हुआ

दिन में जो कि पसीने में महका बहुत
रात में जिस्म वो रात रानी हुआ

लाख चाहत के किस्से सुनाते रहे
लब्ज़ तेरा,मगर,इक कहानी हुआ

गो किया था ज़मीं पर ज़मीं के लिए
उन का दावा मगर आसमानी हुआ

जब गिनाने लगे वो गिनाते रहे
सांस का सिलसिला महरबानी हुआ

कागजों में ज़मींदार मालिक रहा
एक कतरा पसीना किसानी हुआ..

Monday, May 14, 2012

Utha kar Talvar jab ghode pe sawar hote
Baandh ke Saafa jab tayyar hote
Dekhti hai duniya chat pe chadke
Kehte hai ki kaash hum bhi aise hoshiyaar hote


हिंदु भाव को जब जब भूले, आई विपद महान |
भाई छुटे,धरती खोयी,मिटे धर्म संस्थान ||

Saturday, May 12, 2012

चिनगारी बन गयी लहू की बूँद जो पग से;
चमक रहे, पीछे मुड़ देखो, चरण-चिन्ह जगमग से।
शुरू हुई आराध्य-भुमि यह, क्लान्ति नहीं रे राही;
और नहीं तो पाँव लगे हैं क्यों पड़ने दगमग से?
बाकी होश तभी तक जब तक जलता तूर नहीं है;
थककर बैठ गये क्या भाई! मंज़िल दूर नहीं है।

अपनी हड्डी की मशाल से हृदय चीरते तम का,
सारी रात चले तुम दुख झेलते कुलिश का।
एक खेय है शेष, किसी विध पार उसे कर जाओ;
वह देखो, उस पार चमकता है मन्दिर प्रियतम का।
आकर इतना पास फिरे, वह सच्चा शूर नहीं है;
थककर बाइठ गये क्या भाई! मंज़िल दूर नहीं है।

दिशा दीप्त हो उठी प्राप्त कर पुण्य-प्रकाश तुम्हारा,
लिखा जा चुका अनल-अक्षरों में इतिहास तुम्हारा।
जिस मिट्टी ने लहू पिया, वह फूल खिलाएगी ही,
अम्बर पर घन बन छाएगा ही उच्छ्वास तुम्हारा।
और अधिक ले जाँच, देवता इतन क्रूर नहीं है।
थककर बैठ गये क्या भाई! मंज़िल दूर नहीं है।

Life

LIFE is too Beautiful, So follow some rules:
FORGIVE quickly, BELEIVE honestly.
LOVE truely, LAUGH loudly.
NEVER avoid anything that makesYOU SMILE