Friday, June 1, 2012



मैं प्यार की भूखी हूँ
इस तलाश में जीना है मारना है|
जब तक मिट न जाऊँगी मैं
ज़िंदगी का हर पल मारना है|

सुना है वो प्यार से सिचे
तो पत्थर भी फूल बनजते है|
जो वो मरहम लगा दे तो
तो नासूर भी पनप न पाते है|

बिटिया बचावो. ...


........JAI HIND..........




 खरी खरी कहता हूँ मैं बात दोस्तों !

अच्छे नहीं है देश के हालात दोस्तों !!

गर्भ में मारी जाती हो जब कन्याए !

यही तो पतन कि शुरुवात दोस्तों !!


........JAI HIND..........



लिखो जो तारीखे गुलशन हमे भी याद कर लेना !!

के इस गुलशन के लिए ही उजाडा था हमने आशियाँ अपना !!

........JAI HIND..........




कोई कह दे कब काशी ने काबा की दीवारें तोड़ी,
हमने कब मक्का में जाकर मस्जिद या मीनारें तोड़ी !!
तुम खूब पढो कुराने किन्तु हमको भी वेद पढ़ाने दो,
चन्दा से बैर नहीं लेकिन सूरज को अर्ध्य चढाने दो !!
पर अपनी धर्मसुरक्षा में सूरज की आग नहा लेंगें,
.गंगा को पड़ी जरूरत यदि शोणित की नदी बहा देंगे !!
हम सागर हैं पर मत भूलो बलबावन बनकर तपते हैं,
बर्फीली परतों में भी लपटों वाले वंश पनपते हैं !!
तो साफ़ बता दूं अब हिंसक हर लहर मोड़ दी जाएगी,
क्रान्तिग्रंथ में एक कहानी और जोड़ दी जाएगी !!
जो उपवन पर घात करे वो शाख तोड़ दी जाएगी,
जन्मभूमि पर उठी हुई हर आँख फोड़ दी जाएगी !!.



........JAI HIND..........




 केसर की क्यारी में तुमको ईद मनाने ना देंगे !

कश्मीर में कौमी ध्वज तुम्हे फहराने ना देंगे !!

ढाका की मलमल दे दी ,पर माँ का चीर ना देंगे !

लाशों से पाट देंगे तेरी धरती को ,मगर कश्मीर ना देंगे !!

साफ़ शब्द में सुनले ऐ पाकिस्तान ,

तुझे कश्मीर तो क्या कश्मीर की तस्वीर भी ना देंगे !!

........JAI HIND..........