Tuesday, June 12, 2012
Where there is righteousness in the heart
There is beauty in the character.
When there is beauty in the character,
There is harmony in the home.
When there is harmony in the home.
There is order in the nation.
When there is order in the nation,
There is peace in the world.
There is beauty in the character.
When there is beauty in the character,
There is harmony in the home.
When there is harmony in the home.
There is order in the nation.
When there is order in the nation,
There is peace in the world.
........JAI HIND..........
Monday, June 11, 2012
"ए पी जे अब्दुल कलाम द्वारा सफलता के सूत्र":----
(1) जिज्ञासा ,
(2.) ज्ञान,
(3) लगन,
(4) परिश्रम,
(5) जानकारी,
(6) दृढ़ संकल्प,
(7) विचारमंथन
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" ज्ञान का द्वीप जलाए रखूँगा "------ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
‘हे भारतीय युवक
ज्ञानी-विज्ञानी
मानवता के प्रेमी
संकीर्ण तुच्छ लक्ष्य
की लालसा पाप है।
मेरे सपने बड़े
मैं मेहनत करूँगा
मेरा देश महान् हो
यह प्रेरणा का भाव अमूल्य है,
कहीं भी धरती पर,
उससे ऊपर या नीचे
दीप जलाए रखूँगा
जिससे मेरा देश महान हो।
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" ज्ञान का द्वीप जलाए रखूँगा "------ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
‘हे भारतीय युवक
ज्ञानी-विज्ञानी
मानवता के प्रेमी
संकीर्ण तुच्छ लक्ष्य
की लालसा पाप है।
मेरे सपने बड़े
मैं मेहनत करूँगा
मेरा देश महान् हो
यह प्रेरणा का भाव अमूल्य है,
कहीं भी धरती पर,
उससे ऊपर या नीचे
दीप जलाए रखूँगा
जिससे मेरा देश महान हो।
Saturday, June 9, 2012
है जग-जीवन की जननी तू
तेरा जीवन ही है त्याग ।
है अमूल्य वैभव वसुधा का
तेरा मूर्तिमान अनुराग ।
धूल-धूसरित रत्न जगत का
है तेरी गोदी का लाल ।
है जग-बाल जलज का रक्षक
माँ, तेरा मृदु बाहु मृणाल ।
कितनी घोर तपस्या करके
पाती है तू यह वरदान ?
किन्तु विश्व को अनायास ही
कर देती है उसे प्रदान ।
है तुझसे ही लालित-पालित
यह भोला-भला संसार ।
करती है प्लावित वसुधा को
तेरी प्रेम सुधा की धार ।
तेरे दिव्य हृदय में जिसका
रहता है सदैव संचार ।
लिए अंक में मृदुल सुमन को
लता दिखाती है वह प्यार ।
वनस्थली के अंग-अंग में
होता तेरा प्रेम-विकास ।
नव-बसंत उसके आँगन में
जब क्रीड़ा करता सोल्लास ।
सुत वियोग-दुख से विह्वल हो
रोते हैं माँ तेरे प्राण ।
किन्तु सभी कुछ सह लेती तू
हो जिससे जग का कल्याण ।
तेरा जीवन ही है त्याग ।
है अमूल्य वैभव वसुधा का
तेरा मूर्तिमान अनुराग ।
धूल-धूसरित रत्न जगत का
है तेरी गोदी का लाल ।
है जग-बाल जलज का रक्षक
माँ, तेरा मृदु बाहु मृणाल ।
कितनी घोर तपस्या करके
पाती है तू यह वरदान ?
किन्तु विश्व को अनायास ही
कर देती है उसे प्रदान ।
है तुझसे ही लालित-पालित
यह भोला-भला संसार ।
करती है प्लावित वसुधा को
तेरी प्रेम सुधा की धार ।
तेरे दिव्य हृदय में जिसका
रहता है सदैव संचार ।
लिए अंक में मृदुल सुमन को
लता दिखाती है वह प्यार ।
वनस्थली के अंग-अंग में
होता तेरा प्रेम-विकास ।
नव-बसंत उसके आँगन में
जब क्रीड़ा करता सोल्लास ।
सुत वियोग-दुख से विह्वल हो
रोते हैं माँ तेरे प्राण ।
किन्तु सभी कुछ सह लेती तू
हो जिससे जग का कल्याण ।
Jai Maa
Jai Maa Bhaarathi
........JAI HIND..........
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