Friday, June 1, 2012

मंजिल तो मिल ही जायेगी
भटक कर ही सही !

गुमराह तो वो होगें
जो घर निकलेगे ही नही !

 यह प्रजातंत्र एक मंडी है
हर व्यक्ति यहाँ पे घमंडी है
तुम मत ढूढ़ों अर्जुन माधव
अब हर किरदार शिखंडी है ...


........JAI HIND..........
  


देश पर एक ही परिवार का शासन क्यूँ !
और बाकि सब फिरते भूखे भाने क्यूँ !!
जब झंडे छु रहे आसमानों को !
ये देश का भविष्य भूखे नंगे क्यूँ !!
फौजी बोर्डर पे मरता है उसे कोन याद करता है !!
ग्रोथ रेट है 8 या 9 ये पी .एम दावे करता है !!
दावे दुवे छोड़ बाबा(मनमोहन), मर गया जट(किसान) बचाले !!
तू मालिक बाबा सेंटर(केन्द्र) का, मेरी मानले या अपनी मनाले !!!

........JAI HIND..........


मैं प्यार की भूखी हूँ
इस तलाश में जीना है मारना है|
जब तक मिट न जाऊँगी मैं
ज़िंदगी का हर पल मारना है|

सुना है वो प्यार से सिचे
तो पत्थर भी फूल बनजते है|
जो वो मरहम लगा दे तो
तो नासूर भी पनप न पाते है|

बिटिया बचावो. ...


........JAI HIND..........




 खरी खरी कहता हूँ मैं बात दोस्तों !

अच्छे नहीं है देश के हालात दोस्तों !!

गर्भ में मारी जाती हो जब कन्याए !

यही तो पतन कि शुरुवात दोस्तों !!


........JAI HIND..........