Wednesday, May 16, 2012

जन - जन में जलने लगे , अंगारे देख तेरी बर्बादी का ,
लड़ने को तैयार हो गए , हम जंग दूसरी आजादी का ,
न कमी थी न है आज भी ,तैयार है जान- ऐ -वतन के लिए ,
अब जो लहराया न झुकने देंगे , हम तिरंगा नयी आजादी का ,
खड़ा दुश्मन सामने फ़ौज लिए , लिए हाथ में शास्त्र मक्कारी का ,
मिलेगा जवाब जरूर उसको भी , देता साथ प्रभु सच्चाई का ,
एक तो वो दाग बुरा , फिरंगियों की गुलामी का ,
इस पर वो क़र्ज़ सर पर , शहीदों की जवानी का ,
अब जब आया समय पलटकर , रंग रूप लिए अपनों का ,
किसे पता था घर का ही चिराग, जलाएगा घर अपनों का,
उठो  जागो  चलो  कर्म शस्त्र धारण करो ,अब वक़्त नहीं है सोने का
लड़ने को तैयार हो गए , हम जंग दूसरी आजादी का
भारत माता की जय
संतोष यादव, संदीप कपीला

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