Friday, May 25, 2012


इक गुजारिश है - बस थोड़ा सा रो देना........!!!

जब माँ का "कलेजा" कटकर अलग हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब मातृभूमि-रक्षण विफल हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब "कश्यप-तपोभूमि" पर तिरंग-भस्म हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब "स्व-धरा" पर विदेशी ध्वज-लग्न हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब भारत-भूमि का "मुकुट"-पतन हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब सन संतालिस (1947) कल हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब देह से "प्राणों" का "पृथक्करण" हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब पौरुष पर नपुंसकता स्थानापन्न हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !

थोड़ा-सा रो देना के ना हम बचा सके, न तुम बचा पाओगे........
थोड़ा-सा रो देना के हम लिखते रह गए, तुम पढ़ते रह जाओगे........



........JAI HIND..........

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