"हार नहीं जीत है ये पावन पुनीत है ये क्रन्तिकारी गीत है महान वन्दे मातरम,
भगत का गुरुग्रंथ बिस्मिल की हे ये गीता अशफाकुल्लाह का कुरान वन्दे मातरम.
जेल की दीवारों पे जो शहीदों ने लहू से लिखी, जंगे आज़ादी की दास्ताँ वन्दे मातरम.
जिसको फिरंगियों की फांसिया न रोक पाई, शुलियो पे गाया गया गन वन्दे मातरम."
भगत का गुरुग्रंथ बिस्मिल की हे ये गीता अशफाकुल्लाह का कुरान वन्दे मातरम.
जेल की दीवारों पे जो शहीदों ने लहू से लिखी, जंगे आज़ादी की दास्ताँ वन्दे मातरम.
जिसको फिरंगियों की फांसिया न रोक पाई, शुलियो पे गाया गया गन वन्दे मातरम."
........JAI HIND..........

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