Tuesday, May 15, 2012

Maa

कभी अपनी खुशियों को तो कभी खुद को भुला देती थी |
मैं जब रोता था तो माँ मुझे सीने से लगा लोरी सुना देती थी ||

हाथो में छाले और आँखों में चूल्हे का धुआ रहता था |
खुद को भूखा रख कर माँ मुझे भर पेट रोटी खिला देती थी ||

आज मखमल के गद्दों पर बेचैनी से राते कटती है |
कभी माँ अपनी गोद में मेरा सर रख मुझे सुला देती थी ||

रो पड़ता हूँ आज भी बच्चो सा ना जाने क्यों मैं " मानव " |
आज भी माँ मुझे उतनी ही मासूमियत से गले लगा लेती है ||

उसके त्यागों के आगे हिमालय भी मुझे छोटा दिखता है |
उसके चरणों में ही मुझे अपनी जन्नत दिखाई देती है ||

उसका कर्ज जीते जी तो मैं चूका नहीं सकता " मानव "
और वो हर क्षण बस मेरी लम्बी आयु की ही आशीषे देती है ||

मिटा दूँ अगर खुद को तो भी उसको भुला ना पाऊंगा |
वो माँ है,वो मेरी माँ है वो मेरे दिल में, मेरी रगों में बसती है ||

Khatre main hai Hindustan Bhagat Singh

१)आखिर क्यूँ हुवा तू बलिदानभगत सिंह?
सस्ती थी क्या इतनी तेरी जनभगत सिंह
जिस देश के खातिर तू हो गया कुर्बान
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह……..
२)आज की युवा पीड़ी जो की देश का भविष्य है
उस वर्तमान के भविष्य पे संशय है
सड़कों पे बिकती है संस्कारभगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह……..
३)कहने को तो तू युवाओं का आदर्श है
पर कायरता तो कभी नहीं तेरापरामर्श है
भीरु हो गया आज का वर्तमान भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह……..
४)वो लोग जो खुद को तेरा अनुयायी कहते हैं
तेरे सिध्हंतोंका कभी न अनुसरण करते हैं
तेरे फोटो का तो बस करते हैंइस्तेमाल भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह……..
५)तेरे तस्वीर पे फुल-माला तो बस
औपचारिकता हो गयी है
तेरे आदर्शों का पालन तो बसमुर्खता हो गयी है
युवा-पीडी को है काहन इतना अवकाश भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह……..
६)आज की युवा पीडी जो बस बुर्गेर-पिज्जाख ाती है
बीयर-सिगरेट पी कर जरा न अघाती है
अंग्रेजी में करती है हिंदीकी बात भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह……..
७)यहाँ तो बस अब जिस्म की नुमाईश होती है
लाखों पथभ्रष्टों की रोज पैदाइश होती है
बेच रहे हैं वो भारत का सम्मान भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह……..
९)जिस कथित आज़ादी के लिए तूमरा था
तूफ़ान में भी कश्ती लेकर सागर से जा भिड़ा था
उस आज़ादी का तो हो गया बंटाधार भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह……..
१०)हमे तो ये बेवकूफ-बदमाश कहते हैं
तुम्हे भी ये लोग इतिहास कहते हैं
बन रहा ये देश फिर से गुलाम भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह……..
११)गीदड़ों के हाथ में सत्ताचली गयी है
आश्चर्य नहीं सर्कार तुझे भूल गयी है
‘शेर को याद रख ले ‘ गीदड़ों के नहीं है ये औकात भगतसिंह
हमारे दिल में है तेरा पवित्र स्थान भगत सिंह
खतरे में है आज वो हिंदुस्तान भगत सिंह……..
अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे
चांडाल के,
काळ हमारा क्या करेगा,हम भक्त है
महाकाल के...
जय महाकाल........
।वन्दना के इन स्वरों में,
एक स्वर मेरा मिला दो ।
वंदिनी माँ को न भूलो,
राग में जब मत झूलो ।
अर्चना के रत्न कण में,
एक कण मेरा मिला लो।।

जय श्री राम जय माँ भारती....
जो जुबां ने कहा सब जुबानी हुआ
अश्क दिल कि मगर तर्जुमानी हुआ

खूब गरजा,मगर, फिर भी बादल रहा
जब बरसने लगा,तब ही पानी हुआ

दिन में जो कि पसीने में महका बहुत
रात में जिस्म वो रात रानी हुआ

लाख चाहत के किस्से सुनाते रहे
लब्ज़ तेरा,मगर,इक कहानी हुआ

गो किया था ज़मीं पर ज़मीं के लिए
उन का दावा मगर आसमानी हुआ

जब गिनाने लगे वो गिनाते रहे
सांस का सिलसिला महरबानी हुआ

कागजों में ज़मींदार मालिक रहा
एक कतरा पसीना किसानी हुआ..