Friday, May 25, 2012
नौ महीने तक हम तुझे,
कोख में छुपा के चले ,
दो वर्ष तक तो हम तुझे ,
गोद में उठा के चले ,
डेढ़ से दो वर्ष तो हम तेरी ,
हर अनकही कों भी समझे,
फिर तेरी माँ की बस,
बोली सुन के हर्षे
तेरे पहले कदम पर भी ,
हम ही बच्चे बन के उछले,
तेरे भूख प्यास कों भी समझे,
तेरे हर चाल ढाल कों समझे ,
तेरे हर प्रयत्न कू शाबासी हम दिये,
सीख जायें तु तब तक उत्साहित तुझे किये|
पढ़ना लिखना तुझे सिखायें ,
चलना सही डगर बतायें ,
डगमगायें ना कही तु ,
हम हर समय सहारा बान तेरा रहे ,
और आज तु जब बड़ा हो गया ,
हमें ही तु अपना बोझ कह गया |
बुढ़ापा जब हमारा लगा आने,
तब एक भी दिन तुझे हम भारी लगे लगने ,
पिछला सब कुछ भूल तुने ,
लगा अब दूसरों की है सुनने,
माँ तुझे अब लगी है खलने ,
हम से ही चला अपना पिंड छुड़ाने ,
छोड़ आया तु हमें ही वीरानें |
माँ कहने में भी अब लगी तुझे शर्म आने,
फिर भी मैं तो माँ हूँ तेरी ,
तुझे लग जायें यह दुआ मेरी ,
तेरे बच्चे ना करे यह गत तेरी ,
पलकों पर रक्खे आदर करे सदा तेरी ||
कोख में छुपा के चले ,
दो वर्ष तक तो हम तुझे ,
गोद में उठा के चले ,
डेढ़ से दो वर्ष तो हम तेरी ,
हर अनकही कों भी समझे,
फिर तेरी माँ की बस,
बोली सुन के हर्षे
तेरे पहले कदम पर भी ,
हम ही बच्चे बन के उछले,
तेरे भूख प्यास कों भी समझे,
तेरे हर चाल ढाल कों समझे ,
तेरे हर प्रयत्न कू शाबासी हम दिये,
सीख जायें तु तब तक उत्साहित तुझे किये|
पढ़ना लिखना तुझे सिखायें ,
चलना सही डगर बतायें ,
डगमगायें ना कही तु ,
हम हर समय सहारा बान तेरा रहे ,
और आज तु जब बड़ा हो गया ,
हमें ही तु अपना बोझ कह गया |
बुढ़ापा जब हमारा लगा आने,
तब एक भी दिन तुझे हम भारी लगे लगने ,
पिछला सब कुछ भूल तुने ,
लगा अब दूसरों की है सुनने,
माँ तुझे अब लगी है खलने ,
हम से ही चला अपना पिंड छुड़ाने ,
छोड़ आया तु हमें ही वीरानें |
माँ कहने में भी अब लगी तुझे शर्म आने,
फिर भी मैं तो माँ हूँ तेरी ,
तुझे लग जायें यह दुआ मेरी ,
तेरे बच्चे ना करे यह गत तेरी ,
पलकों पर रक्खे आदर करे सदा तेरी ||
........JAI HIND..........
"हार नहीं जीत है ये पावन पुनीत है ये क्रन्तिकारी गीत है महान वन्दे मातरम,
भगत का गुरुग्रंथ बिस्मिल की हे ये गीता अशफाकुल्लाह का कुरान वन्दे मातरम.
जेल की दीवारों पे जो शहीदों ने लहू से लिखी, जंगे आज़ादी की दास्ताँ वन्दे मातरम.
जिसको फिरंगियों की फांसिया न रोक पाई, शुलियो पे गाया गया गन वन्दे मातरम."
भगत का गुरुग्रंथ बिस्मिल की हे ये गीता अशफाकुल्लाह का कुरान वन्दे मातरम.
जेल की दीवारों पे जो शहीदों ने लहू से लिखी, जंगे आज़ादी की दास्ताँ वन्दे मातरम.
जिसको फिरंगियों की फांसिया न रोक पाई, शुलियो पे गाया गया गन वन्दे मातरम."
........JAI HIND..........
इक गुजारिश है - बस थोड़ा सा रो देना........!!!
जब माँ का "कलेजा" कटकर अलग हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब मातृभूमि-रक्षण विफल हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब "कश्यप-तपोभूमि" पर तिरंग-भस्म हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब "स्व-धरा" पर विदेशी ध्वज-लग्न हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब भारत-भूमि का "मुकुट"-पतन हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब सन संतालिस (1947) कल हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब देह से "प्राणों" का "पृथक्करण" हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब पौरुष पर नपुंसकता स्थानापन्न हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
थोड़ा-सा रो देना के ना हम बचा सके, न तुम बचा पाओगे........
थोड़ा-सा रो देना के हम लिखते रह गए, तुम पढ़ते रह जाओगे........
जब माँ का "कलेजा" कटकर अलग हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब मातृभूमि-रक्षण विफल हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब "कश्यप-तपोभूमि" पर तिरंग-भस्म हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब "स्व-धरा" पर विदेशी ध्वज-लग्न हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब भारत-भूमि का "मुकुट"-पतन हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब सन संतालिस (1947) कल हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब देह से "प्राणों" का "पृथक्करण" हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
जब पौरुष पर नपुंसकता स्थानापन्न हो जाए, थोड़ा-सा रो देना !
थोड़ा-सा रो देना के ना हम बचा सके, न तुम बचा पाओगे........
थोड़ा-सा रो देना के हम लिखते रह गए, तुम पढ़ते रह जाओगे........
........JAI HIND..........
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